भारतीय सिनेमा से जुड़ी फिल्म Bison Kaalamaadan इस समय सुर्खियों में है। यह फिल्म कबड्डी खिलाड़ी मनथी गणेशन की ज़िंदगी पर आधारित है। इसमें खेल, संघर्ष और रिश्तों का बेहतरीन मेल है। निर्देशक मारी सेल्वराज ने इस फिल्म को अपने अनोखे अंदाज़ में प्रस्तुत किया है। दमदार अभिनय, रोमांचक कबड्डी मैच और भावनात्मक रिश्ते इसे खास बनाते हैं। हालांकि फिल्म में कुछ कमियाँ भी हैं, लेकिन यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
Bison Kaalamaadan Movie की कहानी
Bison Kaalamaadan की कहानी किट्टन नाम के एक युवा लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपनी ज़िंदगी में सिर्फ एक चीज़ सबसे ज्यादा प्रिय है—कबड्डी। किट्टन का खेल के प्रति जुनून उसे कई कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करने पर मजबूर करता है। वह अपने गांव और परिवार के विरोध के बावजूद अपने सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है।
कहानी में दिखाया गया है कि कैसे किट्टन की मेहनत, समर्पण और साहस उसे खेल के क्षेत्र में पहचान दिलाते हैं। उसके पिता के साथ उसका रिश्ता फिल्म का भावनात्मक केंद्र है। पिता-पुत्र के बीच का प्यार और समझ दर्शकों को गहराई से जोड़ती है।
फिल्म में किट्टन का मेंटर, एक शिक्षक, उसे सही मार्गदर्शन देता है और कठिन परिस्थितियों में उसकी मदद करता है। इसके अलावा, कबड्डी के रोमांचक मैच और खिलाड़ियों की मेहनत फिल्म को और रोमांचक बनाती है।
निर्देशक मारी सेल्वराज का दृष्टिकोण
मारी सेल्वराज अपनी फिल्मों में जानवरों के प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं।
- Bison सिर्फ नाम नहीं, बल्कि यह किट्टन के व्यक्तित्व का प्रतीक है।
- खिलाड़ी की आक्रामकता और उसकी ताकत ‘बाइसन’ की तरह ही महसूस होती है।
- निर्देशक ने सामाजिक और व्यक्तिगत दोनों पहलुओं को संतुलित करने की कोशिश की है।

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स्टारकास्ट और उनके किरदार
इस फिल्म की ताकत इसकी कास्टिंग है।
मुख्य कलाकार
- ध्रुव विक्रम (किट्टन) – शानदार शारीरिक मेहनत और दमदार एक्टिंग।
- पासुपथी (पिता) – इमोशनल रिश्ता फिल्म की आत्मा है।
- मदनकुमार दक्षिणामूर्ति (शिक्षक) – गुरु-शिष्य का रिश्ता दिल छू जाता है।
- आमिर और लाल – छोटे रोल में भी गहरी छाप छोड़ते हैं।
- राजिशा विजयन और अनुपमा – अच्छा अभिनय, लेकिन कम स्क्रीन स्पेस।
तकनीकी पक्ष
इस फिल्म का तकनीकी स्तर भी बेहद मजबूत है।
- सिनेमाटोग्राफी (एझिल अरसु) – देहाती जीवन और कबड्डी मैचों की तीव्रता को जीवंत किया।
- संगीत (निवास के प्रसन्ना) – कहानी का हिस्सा बनकर चलता है, अलग से ध्यान नहीं खींचता।
- एडिटिंग – कुछ जगह धीमी, खासकर फिल्म की लंबाई की वजह से।
पिता-पुत्र का रिश्ता
इस फिल्म की कहानी का सबसे भावनात्मक हिस्सा किट्टन और उसके पिता का रिश्ता है, जो दर्शकों के दिलों को छूता है ।
- फिल्म मे पासुपथी ने ध्रुव विक्रम के पिता का अभिनय बहुत ही जबरदस्त किया हैं जो दर्शकों के दिल को छू लेता है।
- यह रिश्ता फिल्म की आत्मा है जो दर्शकों को फिल्म की गहराई से जोड़ता है।
कमजोरियाँ और चुनौतियाँ
हालांकि फिल्म की कहानी दमदार है, लेकिन कुछ कमियाँ भी हैं।
- यह फिल्म तीन घंटे की जो दर्शकों के धैर्य की परीक्षा लेती है।
- फिल्म में कुछ किरदार देर से आते हैं और वह उतने असरदार नहीं लगते।
- इस फिल्म में राजिशा की डबिंग फिल्म की मिट्टी वाली भावना से मेल नहीं खाती।
- फिल्म के हीरो किट्टन के अंदरूनी भाव दर्शकों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाते।
खास बातें जो दर्शकों को पसंद आएंगी
- इस फिल्म के एडिटोरो ने ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन दृश्यों का बेहतरीन ट्रांज़िशन किया हैं।
- गाँव की कबड्डी मैचों की सिनेमाई प्रस्तुति बहुत ही रोमांचित करता हैं।
- इसमे गाँव मे होने वाली सामाजिक मुद्दों के बारें मे भी दिखाया गह हैं।
- इस फिल्म मे गुरु-शिष्य का संबंध को बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया गया हैं।
- फिल्म मे ध्रुव विक्रम के शारीरिक परिवर्तन को भी दिखाया गया हैं जिससे यह पता चलता हैं कि फिल्म मे जीतने भी कलाकार है उन्होंने बहुत ही मेहनत की हैं फिल्म को जीवंत प्रस्तुत करने के लिए।
Bison Movie Review
- सकारात्मक पहलू: दमदार अभिनय, रोमांचक कबड्डी दृश्य, तकनीकी गुणवत्ता।
- नकारात्मक पहलू: फिल्म की लंबाई, भावनात्मक दूरी, कुछ किरदारों की गहराई की कमी।
कुल मिलाकर यह फिल्म देखने लायक है, खासकर खेल और रिश्तों की कहानियों के शौकीनों के लिए।
FAQs
Bison Kaalamaadan किस पर आधारित है?
यह फिल्म असली कबड्डी खिलाड़ी मनथी गणेशन की ज़िंदगी पर आधारित है।
फिल्म के मुख्य कलाकार कौन हैं?
ध्रुव विक्रम, पासुपथी, मदनकुमार दक्षिणामूर्ति, आमिर, लाल, राजिशा विजयन और अनुपमा इस फिल्म के अहम कलाकार हैं।
फिल्म का निर्देशन किसने किया है?
इस फिल्म का निर्देशन मशहूर निर्देशक मारी सेल्वराज ने किया है।
फिल्म की खासियत क्या है?
कबड्डी मैचों की प्रस्तुति, पिता-पुत्र का रिश्ता और दमदार सिनेमाटोग्राफी इसकी मुख्य खासियतें हैं।
फिल्म कितनी लंबी है?
फिल्म की लंबाई लगभग तीन घंटे है, जो इसकी एक बड़ी चुनौती भी है।
क्या Bison Kaalamaadan परिवार के साथ देखने लायक है?
हाँ, यह फिल्म परिवार और खेल प्रेमियों दोनों के लिए उपयुक्त है।
समीक्षा (Review)
Bison Kaalamaadan मारि सेल्वराज के सिनेमैटिक यूनिवर्स की नई कड़ी है। हालांकि उनकी फिल्में किसी एक सीधी कहानी को फॉलो नहीं करतीं, फिर भी उनमें भावनाओं और विचारों की डोर साफ दिखाई देती है।
सबसे पहले बात करें तो Bison उनकी बेहतरीन फिल्मों में से नहीं है। लेकिन असल कबड्डी खिलाड़ी मनथी गणेशन की ज़िंदगी पर आधारित यह फिल्म अब भी असरदार है और निर्देशक की पहचान अपने साथ लिए हुए है।

